Monday, 15 August 2016

काश की मैं एक परी होती
और मैं भी अनोखे सपने बुनती
कभी हंसती कभी रोती
काश प्यार के मोती मैं भी पिरोती
कभी नाचती कभी गाती
महफिलो में जाके प्यार के नग्मे सुनाती
कभी सुंदर बागों में महकते फूलों में रहती
सुनसान घाटियों में पानी के झरने में बहती
कभी राह चलती ऊँचे ऊँचे पर्वतों की
उड़ान भरती उन्मुक्त आसमानों की
कभी घर घर में जाके लोगों के मन हरती
और फिर सब घरों को एक करती
काश कि मैं भी एक परी होती
और मैं भी अनोखे सपने बुनती
।।।नीलम रावत।।।
15/08/2016

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