Tuesday, 16 August 2016

neelurawat1996@gmail.comअपनी कल्पनाओं का इक अलग संसारबसा लूँ
प्यार प्रेम भाईचारे की इक  मिसाल बना लूँ
सुबह जब भी हो तो सुख की हरियाली हो
शाम ढलते ढलते जहाँ मखमल सी लाली हो
फूल प्रीत की खुश्बू महकाएं जहाँ फलों के झुरमुट हों
मानवता से परिपूर्ण युग हो जहाँ सब धर्म एकजुट हों
परियों का नृत्य हो जहाँ मीठा मीठा गान हो
बाल वृद्ध नारी समाज का प्रतिक्षण सम्मान हो
फसल प्रेम की खूब उगे हर दिल में बरसात हो
सुख दुख के हर पड़ाव पे इक दूजे का साथ हो
धोखे धड़ी भृष्टाचार का न कोई ठिकाना हो
मिल जाय आसानी से हर दिल बस इक बहाना हो
बेगानो के साथ भी अपनों जैसी बात हो
नजारा अनोखा हो बस इक सुहानी सी मुलाकात हो
इस सुखमय संसार में मैं खुद को आजमा लूँ
अपना एक ठिकाना मैं यहाँ भी बना लूँ
चलो बहुत हुआ अब निकलती हूँ कल्पनाओं के संसार से
कुछ रिश्तों का मोल भाव करलूं हकीकत के बाजार में।।।
नीलम रावत
16/08/2016

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