Sunday, 23 October 2016

नहीं चाहिए धन औ दौलत
न चांदी और सोना
नहीँ चाहिए हार मोतियों का
न रत्नजड़ित कोई गहना
मुझे चाहिए सम्मान नारी का
बस इतना है कहना
नहीं फूलों की सेज चाहिए
न कोई हंसीन गुलिस्ता
दुःख दर्द हो जो भी दुनिया का
मुझे ही है सब सहना
हाँ थोड़ा सम्मान चाहिए अबला का
बस इतना सा कहना
न ऊँचा रहन सहन हो
न हो ऊँचा मकान मेरा
कबूल है मिटटी का घरौंदा
जहाँ घास फूस का हो बिछौना
मगर बात हो नारी सम्मान की
बस यही है मुझे कहना
न सतरंगी चादर हो यहाँ
न टहलना उपवन का हो
इक पल आना इक पल जाना
ये ही तो है दुनिया का रहना
इतने में मिले सम्मान स्त्री को
बस इतना ही है कहना
न दिल की बताये न दिल की सुनाए
न कोई अपना समझ कर आजमाए
न ख्वाब हंसी का आये कोई न आसुओं का पिरोना
बस जरा सम्मान नारी का
इतना ही है कहना बस इतना ही है कहना

*नीलम रावत*

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