Sunday, 16 October 2016

☕☕ *चाय*☕☕

हम हैं चाय के बड़े फैन
चाय बिन न सुख न चैन
बिन चाय के बात कहाँ होती
चाय बिना जिंदगी की शुरुआत कहाँ होती
अपनी जिंदगी का चाय से ही गुजारा है
अकेले बन्द कमरे में चाय का ही सहारा है
चाय से ही तंदरुस्ती की पहचान है
बिन चाय के शरीर में भी कहाँ जान है
सवेरा चाय से है शाम चाय से है
दिनभर की थकान से आराम चाय से है
चाय न मिलने से बड़ी और कोई सजा नहीं
चाय जो न पियो तो फिर जिंदगी में मजा नहीं
चाय नहीं तो जिंदगी का किस्सा गुमनाम है
दिनभर के काम के बाद चाय अमृत का जाम है
चाय से है भोर और चाय से है अँधेरा
लुप्त हो जाएगा बिन चाय के जीवन मेरा
चाय है तो मेरी दुनिया भी रंगीन है
बिन चाय के तो मेरा इंद्र धनुष भी रंगहीन है
चाय से जीवन की कल्पना अधूरी है
चाय पे कुर्बान ये जिंदगानी पूरी है।

*नीलम रावत*

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