हर शाम ढलती है

हर शाम ढलती हैं तेरे इंतजार में
हर रात कटती है तेरी यादों में।
जीना भी चाहे तो जियें कैसे
मेरा हर लम्हा कटता है तेरे ख्यालों में।।
तुझे हर रोज देखने के लिए में तड़पती हूँ
तेरी एक झलक के लिए मैं कितना तरसती हूँ
यूँ ही फैसला लिया उसे जिंदगी बनाने का
उसे पाने की चाहत में अब हर रोज मरती हूँ
बिन उसके अब पल भर भी चैन नहीं मिलता है
सौगात में दूं तुझे अब ऐसा कोई फूल नही खिलता है
मै बस यूं ही करवट बदलती रह गयी
मिरा  हर लम्हा आजकल तेरे इंतजार में फिसलता है...
An imagination....
By #NEelAm_RAwAT

1 comment:

  1. Khooob silsila hai yeh yaado ka aati hai aur rulati hai #grt nilu

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