Monday, 31 December 2018

अब न रुकूँ अब न थकूं
पथ पे निरन्तर अब चलूँ
पर नहीं मेरे तो क्या?????
सपनों की उड़ान में उड़ चलूँ
मंजिल की डगर अब मैं चलूँ।।
रास्तों में ठोकरें खाकर
बह जाये चाहे खून पसीना
धूप छांव की परवाह नहीं अब
अंगारों में जलकर चलूँ
मंजिल की डगर अब मैं चलूँ।।
तूफानों से टकराकर
लाख बिजलियाँ क्यों न गिरे
काले बादल क्यों न घिरे
टूटती धाराओं में भीगकर चलूँ
मंजिल की डगर अब मैं चलूँ।।
चाहे कितनी भी विपत्तियां हों
कितनी भी बाधाएं हो राहों में
कोई झुका न सकेगा मुझे
दृढ़ संकल्प है अब न मैं भटकूँ
मंजिल की डगर अब मैं चलूँ।।
#नीलम_रावत

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