Tuesday, 12 March 2019

मेरे हो जाओ तुम या मुझ पर अधिकार करो
ये निमंत्रण प्रेम का अब तो तुम स्वीकार करो

दिल की दहलीजों पे तुम मुहब्बत का आगाज करो
तोड़ो सब बन्धनों को तुम अब ख्वाइशें परवाज करो
प्यार परोसो सौगातों में जिंदगी माला माल करो
रंग दो अपनी मुहब्बत से हमको ,तुम दिल अब गुलाल करो

बनें जनम जनम के साथी हम बस इक बार ऐतबार करो
ये निमंत्रण प्रेम का अब तो तुम स्वीकार करो

रूखी सुखी धड़कनों में पानी की बौछार भरो
मन के वीरानों को तुम अब तो गुलजार करो
खुद के जीवन पर न तुम अब कोई सवाल रखो
जीवन की राहों में अब मेरा भी खयाल रखो

पल भर भी न रुको अब न इंतजार करो
ये निमंत्रण प्रेम का अब तो तुम स्वीकार करो

प्रीत की पनाहों में इक दूजे का सम्मान करें
पहले प्रेम के गीतों का मधुरिम इक गान करें
नि संकोच हो जाये हम न खाबों में मलाल रहे
रातों दिन आठो प्रहर अब इक दूजे का खयाल रहे

खो जाओ तुम भी मुझमे, मुझसे अब तुम प्यार करो
ये निमंत्रण प्रेम का अब तो तुम स्वीकार करो

धड़कन को धड़कन में अब तो मिल जाने दें
दो दिलों की जमीन को अब हम एक हो जाने दें
दिल की दीवारों में बंद अब न कोई जज्बात रहे
धूप छाँव का सफर हमारा इक दूजे के साथ रहे

छोड़ो अब इशारे आंखों के खुल कर तुम भी इजहार करो
ये निमंत्रण प्रेम का अब तो तुम स्वीकार करो।।
@नीलम रावत

7 comments

This comment has been removed by the author.

शुक्रिया जनाब

REPLY

Bahut sahi hai!!
Lekin mujhe samaj nahi aaya!!!

REPLY

Thanku..
Koi nhi..Time lgega tujhe😂

REPLY

Neelam Rawat. Powered by Blogger.

घाटियों की गूंज . 2017 Copyright. All rights reserved. Designed by Blogger Template | Free Blogger Templates