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हे नारियो इस जहान की

हे नारियो इस जहान की

हे नारियो जहान की
बनाओ नई पहचान भी
तुम रुको नहीं कभी
तुम झुको नहीं कहीं
तुम सृष्टि का श्रृंगार हो
तुम सृजन का आधार हो
बने रहो समाज में
खो न जाना आज में
मनुष्यता का बल हो तुम
आने वाला कल हो तुम
इस धरा का प्राण हो
पुरुषार्थ का कल्याण हो।

हे नारियो जहान की
पीछे अब न रहो तुम 
कदम कदम बढ़ाओ तुम
भेद भाव मिटाओ तुम
अपने हाथ की लकीरों से
नया समाज रचाओ तुम
डरी सहमी रहो नहीं
दानवों से डरो नहीं
बेड़ियों को छोड़ दो
चूड़ियों को तोड़ दो
इस जहां के पापियों  को
बेटियों के अपराधियों को
अब तुम बगसो नहीं
काल-विकराल बन
चीरो उनके वक्ष को
रूप कालिका का धर
तुम दानवों को भक्ष दो
रहो न कैद दीवारों में
अब देहलियों को लांघ दो
दबी कुचली रहो नहीं
अपना हक अब मांग दो।

हे नारियो जहान की
तुम सोच को संवार दो
तुम कल्पनाओं को उड़ान दो
विज्ञान को पछाण दो
तुम समाज को नई एक पहचान दो
मिटाओ खुद कर परिहास को
तुम नया इतिहास दो
हर दशा में चलो हर दिशा में चलो
अपने अपने क्षेत्र में अग्रणी बने रहो।

हे नारियो जहान की
याद रखना ये बात भी
तुम रानी लक्ष्मीबाई के वंशज हो
तुमने गोकुल में राग गाये थे
कान्हा के संग में तुम रास रचाये थे
अपनी कोख में तुमने वीर शिवा उपजाए हैं
शरहद पे होतें हैं शहीद जो,
वो वीर तुमने पाले हैं

हे नारियो जहान की
बजाओ विकास के शंख को
अपनी घर की बेटियों को
तुम नए पंख दो
बाटों संस्कार को
 नैतिकता उपहार दो
नई नई पंखुड़ियों को
प्यार दो दुलार  दो
जग में एक बार तुम
ममत्व को प्रसार दो
तुम खुशियों का अंबार हो
तुम मानवता को निखार दो
सभ्यता का प्रमाण दो
रहो जहां कहीं भी तुम
मा के जैसा लाड़ दो
तुम बहन सा दुलार दो
सभी को समान दो 
तुम सबको सम्मान दो
ऐ नारियो जहान की
बनाओ नई पहचान भी
जब जग को निधान दो
सबको वरदान दो।।
नीलम रावत

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