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International women's day|| neelam rawat|| hindi poetry

अन्तर्राष्ट्रीय  महिला दिवस 

समाज में महिलाओं  के दो वर्ग बने हैं....... 


पहला --
 वह जिन्होंने  गंवा दी उम्र किचन के बर्तनों पे गुस्सा निकालने  में.
जो कैद होकर घुट रहे हैं  घर की दहलीज के भीतर ...  
जिन पर होता रहा  है शोषण अथाह ,
जिन्हें  मिला  नहीं सम्मान परिवार में उन के औधे के अनुसार...... 
जिनका सोच का दायरा अत्यंत सीमित हो गया 
कलुषित समाज की वजह से जिनके  सपनों के पंख काट दिए हैं 
जिन्होंने  बेफजूल जंजीरों में बंधे रहने की आदत बना ली है....  
जिन्होंने  सही  है जन्म से मरण तक एक नितांत पीड़ा।

दूसरा --
जो हर क्षेत्र में प्रवीणता प्रदर्शित कर रहे हैं..  . 
 जो प्रेरणा स्रोत बने  हुवे हैं  समाज में ,
जिनकी मिसालें पेश करता है समाज बार बार 
जिन्होंने  तय कर  लिया सफर रसोई से चाँद तक का.......  
जिनके लिए दर्द का निवारण दर्द को सहते रहना नहीं है 
जो घर से निकल कर  घर बनाने चली हैं  किसी अन्य ग्रह पर...  
जो विचरण करते हैं अपने सपनों की आजाद हवाओं में। 
       
अब तुम्हें तय करना है कि तुम्हें समाज के किस वर्ग को चुनना है.....  
समाज की चुनौतियों से लड़ कर  बढ़ना है या 
अपने ऊपर होती अस्पृश्यता को चुपचाप सहकर मरना है ,
जो स्त्री शब्द के बिलकुल प्रतिकूल है।
 ~ नीलम रावत  

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