International women's day|| neelam rawat|| hindi poetry

अन्तर्राष्ट्रीय  महिला दिवस 

समाज में महिलाओं  के दो वर्ग बने हैं....... 


पहला --
 वह जिन्होंने  गंवा दी उम्र किचन के बर्तनों पे गुस्सा निकालने  में.
जो कैद होकर घुट रहे हैं  घर की दहलीज के भीतर ...  
जिन पर होता रहा  है शोषण अथाह ,
जिन्हें  मिला  नहीं सम्मान परिवार में उन के औधे के अनुसार...... 
जिनका सोच का दायरा अत्यंत सीमित हो गया 
कलुषित समाज की वजह से जिनके  सपनों के पंख काट दिए हैं 
जिन्होंने  बेफजूल जंजीरों में बंधे रहने की आदत बना ली है....  
जिन्होंने  सही  है जन्म से मरण तक एक नितांत पीड़ा।

दूसरा --
जो हर क्षेत्र में प्रवीणता प्रदर्शित कर रहे हैं..  . 
 जो प्रेरणा स्रोत बने  हुवे हैं  समाज में ,
जिनकी मिसालें पेश करता है समाज बार बार 
जिन्होंने  तय कर  लिया सफर रसोई से चाँद तक का.......  
जिनके लिए दर्द का निवारण दर्द को सहते रहना नहीं है 
जो घर से निकल कर  घर बनाने चली हैं  किसी अन्य ग्रह पर...  
जो विचरण करते हैं अपने सपनों की आजाद हवाओं में। 
       
अब तुम्हें तय करना है कि तुम्हें समाज के किस वर्ग को चुनना है.....  
समाज की चुनौतियों से लड़ कर  बढ़ना है या 
अपने ऊपर होती अस्पृश्यता को चुपचाप सहकर मरना है ,
जो स्त्री शब्द के बिलकुल प्रतिकूल है।
 ~ नीलम रावत  

2 Comments

  1. Task Force 2021 and Beyond report highlights progressive educating practices that MIT instructors have integrated into in-person classes, knowledgeable by remote-teaching experiences. MIT researchers have developed a robotic that may 3-D print the fundamental structure of buildings, writes Matthew Hutson for Science. The autonomous robotic sprays an increasing foam into the specified shape “to construct up a hole wall that serves as Kids Shower Curtains insulation and may later be crammed with concrete and lined in plaster,” explains Hutson. Don Reisinger writes for Fortune that MIT researchers have developed a robotic that may 3-D print a free-standing structure in 14 hours. The researchers hope the robotic, which consists of two robotic arms attached to a car, can be utilized to construct buildings in “disparate parts of the world and even on different planets,” explains Reisinger. “With this technology, the probabilities for texture and kind are on another stage in comparison with} current meat analogues, being restricted only by imagination, not processing methods,” ​said Mycorena CIO Paula Teixeira.

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