मकर सक्रांति एक नजर में➡️
मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होता है। उत्तरायण के समय दिन लंबे और रातें छोटी होती हैंं। जब सूर्य उत्तरायण होता है तो तीर्थ यात्रा व उत्सवों का समय होता।  उत्तरायण के समय पौष-माघ मास चल रहा होता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है, इसीलिए इसी काल में नए कार्य, गृह प्रवेश , यज्ञ, व्रत - अनुष्ठान, विवाह, मुंडन जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है।



हिंदू पञ्चाङ्ग के अनुसार एक वर्ष में दो परिवर्तन अथवा अयन होते हैं एक उत्तरायण एवं एक दक्षिणायन, दक्षिणायन को नकारात्मक रूप से लिया जाता है जबकि उत्तरायण सकारात्मकता का सूचक है । मकरसक्रांति का पर्व पूरे भारत में भिन्न-भिन्न त्यौहारों के रूप में मनाया जाता है, जैसे कहीं मकर सक्रांति, कहीं उत्तरायण, कहीं पोंगल कहीं खिचड़ी, कहीं लोहड़ी, कहीं बीहु इत्यादि । यह त्यौहार नई ऊर्जा नए उत्साह के साथ मनाया जाता है।



इतिहास में महत्व- कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का संहार कर लंबे समय से देवताओं और असुरों के बीच जारी युद्ध के समाप्ति की घोषणा की थी। साथ ही सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था. इस तरह यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।
माना जाता है महाभारत के युद्ध मे बुरी तरह घायल होने के उपरांत भीष्म पितामह ने प्राण त्यागने के लिए आज के दिन की प्रतीक्षा करि थी, इसी दिन का गंगा  मैया को राजा भगीरथ के साथ स्वर्ग से धरती में आकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए समुद्र में मिल जाने का महत्व भी बताया जाता है, इसी दिन भगीरथ ने अपने पूर्वजों को तर्पण दिया था। आज के दिन समुद्र किनारे के इलाकों में भी त्यौहार एवं मेले लगते हैं। आज के दिन का गंगा स्नान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन ही सूर्य भगवान अपने पुत्र शनि से मिलने उसके घर जाया करते थे, शनि मकर राशि के स्वामी होने के नाते इस दिन को "मकर सक्रांति" कहते हैं।
मकर सक्रांति का यह त्यौहार सिर्फ भारत मे ही नहीं बल्कि बांग्लादेश, नेपाल ,भूटान म्यांमार,कम्बोडिया आदि देशों में भी अलग अलग नामों से मनाया जाता है।। 
उत्तराखण्ड में उत्तरैणी-मकरैणी- देश भर में प्रसिद्ध नव ऊर्जा एवं उत्सव के इस पर्व को उत्तराखंड में भी बड़ी धूम धाम से उत्तरैणी के रूप मनाया जाता है। गढ़वाल क्षेत्र में कही जगह इसे खिचड़ी संग्रांद और कुमाऊँ में घुघुतिया त्यार के रूप में मनाया जाता है।

आज के दिन कुमाऊँ क्षेत्र में बनाया जाने वाला प्रसिद्ध पकवान (घुघुते) 

(उत्तराखंड के गढ़‌वाल  क्षेत्र में बनायी  जाने वाली  खास पकवान - घीं में  बनी खिचड़ी और , अन्य घीं के पकवान भी बनते हैं, इसलिए गढ़वाल क्षेत्र में इसे  घीं संग्रानद भी कहते हैं।।)
   
 कहीं कहीं बिना किसी के मुँह देखे स्नान करके टीका लगाने  की परंपरा भी है इस दिन । 
कई लोग सुबह ही गंगा स्नान करने प्रयाग हरिद्वार या अन्य संगमों में जाते है। आज के दिन सभी देवी देवताओं को भी संगम में प्रयाग राज या हरिद्वार या नदी किनारे स्नान करवाया जाता, ऐसा कहते हैं  इस दिन स्नान कराने से देवी देवताओं की शक्तियां बढ़ती हैं।

इस दिन उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले में सरयू और गोमती नदी के तट पर भी भव्य मेले का आयोजन होता है, इस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं । श्रद्धालु सरयू और गोमती नदी के संगम पर डुबकी लगाते हैं और बागनाथ मंंदिर मेंं भगवान शिव के दर्शन करते हैं एवम् भिक्षुकों को दान-दक्षिणा देकर पुण्य अर्जित करते हैं ।



 सन 1905 में ई. में शर्मन ओखले, जो की ब्रिटिश लेखक थे और लन्दन मिशनरीज के साथ भारत आये थे | उन्होंने अपनी पुस्तक "होली हिमालयाज"  Holy Himalayas में लिखा है कि यह मेला कुुमाऊ का सबसे बड़ा एवम् लोकप्रिय मेला है” | जिसमे पुुुरा ने समय में 20,000 से 25,000 श्रद्धालु आते थे 
विभिन्न नाम भारत मे➡️➡️⬇️
●मकर संक्रान्ति : छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू

ताइ पोंगल, उझवर तिरुनल : तमिलनाडु

उत्तरायण : गुजरात, उत्तराखण्ड

माघी : हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब

भोगाली बिहु : असम

शिशुर सेंक्रात : कश्मीर घाटी

खिचड़ी : उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार

पौष संक्रान्ति : पश्चिम बंगाल

मकर संक्रमण : कर्नाटक

लोहड़ी : पंजाब

विभिन्न नाम भारत के बाहर➡️

बांग्लादेश : Shakrain/ पौष संक्रान्ति

नेपाल : माघे संक्रान्ति या 'माघी संक्रान्ति' 'खिचड़ी संक्रान्ति'

थाईलैण्ड : सोंगकरन

लाओस : पि मा लाओ

म्यांमार : थिंयान

कम्बोडिया : मोहा संगक्रान

श्री लंका : पोंगल, उझवर तिरुनल

इस दिन किसान अपनी फसल की अच्छी उपज एवं खुशहाली के लिए भगवान से प्रार्थना एवं भगवान का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।
यह त्यौहार किसानों के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता।

नीलम रावत